दो चार घड़ी
गमे दुनिया से कभी
फुरसत जो मिले
दुनिया मे सुकूँ १ की बातें
दमकते हुए आरज २
होंठ
होंटों की फुंसुकार३ हँसी
निगाहों के फुंसूकी बातें
दुनिया मे सुकूँ की बातें
कैसी होती है खुशबु
कैसे खिलते हँ कमल
कैसे बहारों का समां आता है
और ज़ज्बा -ऐ -शौक जवाँ होता है
साकी -जाम -ओ - पैमाने४ के किस्से
सागर - ओ - मय - ओ - मयखाना
रक्स -ऑ -झंकार ५ ये नगमे
अफ्लास ६ की दुनिया से परे
नूर7 के सांचे मे ढले
कमखाब - ऑ८ अतलस का लिबास
रेशमी जुल्फें रेशमी आँचल
इसी धरती पर एक और भी धरती है
इन क़दमों का गुजर
नही जिसके सीने पर
उसके सुख कैसे हैं
लोग कैसे रहते हैं
प्यार के गीत क्या हैं
गीतों की लय क्या है
नयनों से मय का छलकना कैसा
गमे दौरां ९ से जरा
बस एक लमहा १०
फुरसत जो मिले ,राहत11 जो मिले
बिरहा की जलन है कैसी
साजन का मिलना है कैसा
इंतजार के पल क्या हैं
कैसे ढलते हैं सरेशाम
शाम के साये
मह्ब्ब्त की तपिश मे जलना
और जलते रहना
इश्क - ऑ जुनूं की बातें
ऐ काश कि हम भी सोचें
दो चार घडी
गमे दुनिया से कभी
राहत जो मिले
फुरसत जो मिले
______________________
1 शान्ति २ गाल ३ जादूभरी ४ मदिरा पिलाने का पात्र ५ नाच ६ निर्धनता ७ रौशनी ८ बहुमूल्य कपडों का नाम 9 दुःख भरा युग १० शंन ११ शान्ति
Tuesday 27 May 2008
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
0 comments:
Post a Comment