उस पार
कहाँ रहते हो तुम
कितने मोड़ आएगे
तेरे घर तक आते आते
सरे रह खड़े
खामोश दरख्तों से
मैं -
तेरा पता पूछूँ
कि न पूछूँ
कोई बोलेगा कि नही बोलेगा
उस पार
यहाँ तुम रहते हो
लोग प्यार को क्या कहते हैं
पहली मुलाकात के बाद
फ़िर - कभी यूँ ही
कोई मिलता है कि नही मिलता
प्यार से डरते तो नही लोग
बोलो
उस पार
मैं - आऊं कभी
कि न आऊं
उस पार
यहाँ तुम रहते हो
लोग प्यार को क्या कहते हैं
Wednesday 23 September 2009
Sunday 19 July 2009
बोल कवि
उड़ कर तेरी सोच के पंछी
बोल कवि
अब और कहाँ जायेगे
तरनी तट तरुवर सूखे
घर आँगन
टूट गए दीवारों दर के रिश्ते
जंगल जंगल बस्ती बस्ती
सुबह सवेरे
मुह अंधेरे
घूम गया कोई जैसे
वैर विरोध का घोड़ा लेकर
वह नेजें तलवारें बाँट गया
गावों और शहरों की
दीवारें बाँट गया
छत्तों और मुंडेरों पर
धर्मों के नाम लिख लिए लोगों ने
किस छत पर उतेरेंगे
किस जात का दाना खायेगे
उड़ कर तेरी सोच के पंछी
बोल कवि
अब और कहाँ जायेगे
धरती धरती आग जले
अम्बर अम्बर धुआं
बोल कवि
अब और कहाँ जायेगे
तरनी तट तरुवर सूखे
घर आँगन
टूट गए दीवारों दर के रिश्ते
जंगल जंगल बस्ती बस्ती
सुबह सवेरे
मुह अंधेरे
घूम गया कोई जैसे
वैर विरोध का घोड़ा लेकर
वह नेजें तलवारें बाँट गया
गावों और शहरों की
दीवारें बाँट गया
छत्तों और मुंडेरों पर
धर्मों के नाम लिख लिए लोगों ने
किस छत पर उतेरेंगे
किस जात का दाना खायेगे
उड़ कर तेरी सोच के पंछी
बोल कवि
अब और कहाँ जायेगे
धरती धरती आग जले
अम्बर अम्बर धुआं
Thursday 16 July 2009
Thursday 14 August 2008
अंतराल
जब भी कोई शब्द मिला
साथ मिले उसके लाखों ही प्रश्न चिन्ह
युग युग की कविता और छंद अनेक
एक प्रश्नचिन्ह मे ढल जायेगे
संस्कृति के उच्च शिखरों पर
गौतम की सत्य अहिंसा
तप त्याग वर्धमान का
क्यों महलों से निकले ?
जंगल जंगल भटके क्यों ?
धर्मों के आदर्श कठोर
और उनके सुकुमार बदन
एटमकी गर्मी से अन्तराल तक जल जायेगे
इन्द्र धनुषी पींगों के रंग
श्याम वर्ण से घुल जायेंगे
एक प्रश्न चिन्ह मे ढल जायेंगे
महा प्रलय का चित्रण
कैसे कोई चित्रकार करेगा ?
अंधियारे युग का वर्णनं इतिहासकार करेगा कैसे ?
ऐसे कोई परिकल्पना
हिमाच्छादित गिरिश्रिन्ख्ला
मनु कहीं पर बैठा होगा
और भटक रही होंगी कहीं श्रद्धा
आलिंगन - विकास विकास फ़िर
विकास की चरम सीमा
कोन किसीका चीर हरेगा
युद्ध शेत्र कहाँ बनेगा
किसके लिए लडेगा धर्मराज
वह शन् -कृष्ण जब
दिखलायेगा विराट रूप
ओर मोह भंग अर्जुन का होगा
इसबार मगर ऐसा कोई द्रश्यनही होगा
क्योंकि -युद्ध
मात्र एक शण का होगा
ओर यह सब एक प्रश्नचिन्ह मे ढल जायेगे
धर्मों के आदर्श कठोर
ओर उनके सुकुमार बदन
एटम की गर्मी से अन्तराल तक जल जायेगे
साथ मिले उसके लाखों ही प्रश्न चिन्ह
युग युग की कविता और छंद अनेक
एक प्रश्नचिन्ह मे ढल जायेगे
संस्कृति के उच्च शिखरों पर
गौतम की सत्य अहिंसा
तप त्याग वर्धमान का
क्यों महलों से निकले ?
जंगल जंगल भटके क्यों ?
धर्मों के आदर्श कठोर
और उनके सुकुमार बदन
एटमकी गर्मी से अन्तराल तक जल जायेगे
इन्द्र धनुषी पींगों के रंग
श्याम वर्ण से घुल जायेंगे
एक प्रश्न चिन्ह मे ढल जायेंगे
महा प्रलय का चित्रण
कैसे कोई चित्रकार करेगा ?
अंधियारे युग का वर्णनं इतिहासकार करेगा कैसे ?
ऐसे कोई परिकल्पना
हिमाच्छादित गिरिश्रिन्ख्ला
मनु कहीं पर बैठा होगा
और भटक रही होंगी कहीं श्रद्धा
आलिंगन - विकास विकास फ़िर
विकास की चरम सीमा
कोन किसीका चीर हरेगा
युद्ध शेत्र कहाँ बनेगा
किसके लिए लडेगा धर्मराज
वह शन् -कृष्ण जब
दिखलायेगा विराट रूप
ओर मोह भंग अर्जुन का होगा
इसबार मगर ऐसा कोई द्रश्यनही होगा
क्योंकि -युद्ध
मात्र एक शण का होगा
ओर यह सब एक प्रश्नचिन्ह मे ढल जायेगे
धर्मों के आदर्श कठोर
ओर उनके सुकुमार बदन
एटम की गर्मी से अन्तराल तक जल जायेगे
Saturday 19 July 2008
अल्फ नंगी
न कोई नारा
न हाथ मे परचम
चेहरे पे मसर्रत के नकूश
न क़दमों मे बगावत
साथ उसके न कोई बशर था
न कोई ऐहसासऐ शामो सहर था
बरगद की घनी छाओं मे वह बैठा भी नही
कोई सदा
आहट भी नही कोई
जुल्फों की महक
आँचल की हवा
उसने तेरी आंखों मे देखा भी नही
घनी छाओं मे बैठा भी नही
सैंकड़ों सूरज
लाखों दरिया
समंदर और
कभी न पिघलने वाले बर्फ के घर
दुशवार जंगलों से
कैलाश की चोटियों तक
उसका साया , किसी ने देखा भी नही
वह गंगा के किनारे ठहरा भी नही
उसका साया ?
वह कोई बाद रूह तो नही
नही हरगिज भी नही
कृष्ण की राधा
यशोधरा और सीता
कृष्ण का सुदर्शन
अर्जुन के तीर और गांडीव
सुनसान रास्तों पर
एक कुटिया और
उसमे जलता हुआ दीया
दूर तक तपता हुआ सहरा
एक सरसब्ज दरख्त
और
उसका घना साया
भटके हुए रेवड़
टूटी हुई बंसी
एक बच्चा एक चरवाहा
आसमां पे दौड़ते हुए स्याह बादल
सितारे
ज़मीन और उसकी कशिश
शबनम और सफ़ेद मोती
कहकशां
नाजुक तितलियाँ
फूल और खुशबु
या
सरे मिज़गां ठहरा हुआ आंसू
वर्धमान का तप भी नही
मीरा की भक्ति
शिव की शक्ति भी नही
कुरान
बाइबल
गीता
चुप हैं अजंता की बोलती तस्वीर
शायद यहाँ जिंदगी लिबास बदलती है
मंजिल बहुत करीब है शायद
मय प्यालों मे डाल दो सारी
इधर उधर बिखेर दो शीशे
खुले रहे मयकदों के दरवाजे
मंजिलें बहुत करीब है शायद
हर तरफ धुआं -धुआं
शहर और बस्तियों पर
गिर रही है एटमी धुल
किसी का घर नही महफूज
लोग चाँद पर जा रहे हैं
पत्थर युग का आगाज़ है शायद
समझ नही आता किस तरह याद रखें
हजारों मील लम्बी तहजीब की नज्में
कोन याद रखेगा ?
खैर आओ चलो देखें
कहाँ है वह तहखाना
जहाँ महात्मा बुद्ध का एक अदद बुत
महफूज़ करना है
मंजिलें बहुत करीब हैं शायद
जिंदगी अल्फ नंगी खड़ी है
लगता है लिबास बदल रही है
न हाथ मे परचम
चेहरे पे मसर्रत के नकूश
न क़दमों मे बगावत
साथ उसके न कोई बशर था
न कोई ऐहसासऐ शामो सहर था
बरगद की घनी छाओं मे वह बैठा भी नही
कोई सदा
आहट भी नही कोई
जुल्फों की महक
आँचल की हवा
उसने तेरी आंखों मे देखा भी नही
घनी छाओं मे बैठा भी नही
सैंकड़ों सूरज
लाखों दरिया
समंदर और
कभी न पिघलने वाले बर्फ के घर
दुशवार जंगलों से
कैलाश की चोटियों तक
उसका साया , किसी ने देखा भी नही
वह गंगा के किनारे ठहरा भी नही
उसका साया ?
वह कोई बाद रूह तो नही
नही हरगिज भी नही
कृष्ण की राधा
यशोधरा और सीता
कृष्ण का सुदर्शन
अर्जुन के तीर और गांडीव
सुनसान रास्तों पर
एक कुटिया और
उसमे जलता हुआ दीया
दूर तक तपता हुआ सहरा
एक सरसब्ज दरख्त
और
उसका घना साया
भटके हुए रेवड़
टूटी हुई बंसी
एक बच्चा एक चरवाहा
आसमां पे दौड़ते हुए स्याह बादल
सितारे
ज़मीन और उसकी कशिश
शबनम और सफ़ेद मोती
कहकशां
नाजुक तितलियाँ
फूल और खुशबु
या
सरे मिज़गां ठहरा हुआ आंसू
वर्धमान का तप भी नही
मीरा की भक्ति
शिव की शक्ति भी नही
कुरान
बाइबल
गीता
चुप हैं अजंता की बोलती तस्वीर
शायद यहाँ जिंदगी लिबास बदलती है
मंजिल बहुत करीब है शायद
मय प्यालों मे डाल दो सारी
इधर उधर बिखेर दो शीशे
खुले रहे मयकदों के दरवाजे
मंजिलें बहुत करीब है शायद
हर तरफ धुआं -धुआं
शहर और बस्तियों पर
गिर रही है एटमी धुल
किसी का घर नही महफूज
लोग चाँद पर जा रहे हैं
पत्थर युग का आगाज़ है शायद
समझ नही आता किस तरह याद रखें
हजारों मील लम्बी तहजीब की नज्में
कोन याद रखेगा ?
खैर आओ चलो देखें
कहाँ है वह तहखाना
जहाँ महात्मा बुद्ध का एक अदद बुत
महफूज़ करना है
मंजिलें बहुत करीब हैं शायद
जिंदगी अल्फ नंगी खड़ी है
लगता है लिबास बदल रही है
Tuesday 27 May 2008
गमे दुनिया से कभी
दो चार घड़ी
गमे दुनिया से कभी
फुरसत जो मिले
दुनिया मे सुकूँ १ की बातें
दमकते हुए आरज २
होंठ
होंटों की फुंसुकार३ हँसी
निगाहों के फुंसूकी बातें
दुनिया मे सुकूँ की बातें
कैसी होती है खुशबु
कैसे खिलते हँ कमल
कैसे बहारों का समां आता है
और ज़ज्बा -ऐ -शौक जवाँ होता है
साकी -जाम -ओ - पैमाने४ के किस्से
सागर - ओ - मय - ओ - मयखाना
रक्स -ऑ -झंकार ५ ये नगमे
अफ्लास ६ की दुनिया से परे
नूर7 के सांचे मे ढले
कमखाब - ऑ८ अतलस का लिबास
रेशमी जुल्फें रेशमी आँचल
इसी धरती पर एक और भी धरती है
इन क़दमों का गुजर
नही जिसके सीने पर
उसके सुख कैसे हैं
लोग कैसे रहते हैं
प्यार के गीत क्या हैं
गीतों की लय क्या है
नयनों से मय का छलकना कैसा
गमे दौरां ९ से जरा
बस एक लमहा १०
फुरसत जो मिले ,राहत11 जो मिले
बिरहा की जलन है कैसी
साजन का मिलना है कैसा
इंतजार के पल क्या हैं
कैसे ढलते हैं सरेशाम
शाम के साये
मह्ब्ब्त की तपिश मे जलना
और जलते रहना
इश्क - ऑ जुनूं की बातें
ऐ काश कि हम भी सोचें
दो चार घडी
गमे दुनिया से कभी
राहत जो मिले
फुरसत जो मिले
______________________
1 शान्ति २ गाल ३ जादूभरी ४ मदिरा पिलाने का पात्र ५ नाच ६ निर्धनता ७ रौशनी ८ बहुमूल्य कपडों का नाम 9 दुःख भरा युग १० शंन ११ शान्ति
गमे दुनिया से कभी
फुरसत जो मिले
दुनिया मे सुकूँ १ की बातें
दमकते हुए आरज २
होंठ
होंटों की फुंसुकार३ हँसी
निगाहों के फुंसूकी बातें
दुनिया मे सुकूँ की बातें
कैसी होती है खुशबु
कैसे खिलते हँ कमल
कैसे बहारों का समां आता है
और ज़ज्बा -ऐ -शौक जवाँ होता है
साकी -जाम -ओ - पैमाने४ के किस्से
सागर - ओ - मय - ओ - मयखाना
रक्स -ऑ -झंकार ५ ये नगमे
अफ्लास ६ की दुनिया से परे
नूर7 के सांचे मे ढले
कमखाब - ऑ८ अतलस का लिबास
रेशमी जुल्फें रेशमी आँचल
इसी धरती पर एक और भी धरती है
इन क़दमों का गुजर
नही जिसके सीने पर
उसके सुख कैसे हैं
लोग कैसे रहते हैं
प्यार के गीत क्या हैं
गीतों की लय क्या है
नयनों से मय का छलकना कैसा
गमे दौरां ९ से जरा
बस एक लमहा १०
फुरसत जो मिले ,राहत11 जो मिले
बिरहा की जलन है कैसी
साजन का मिलना है कैसा
इंतजार के पल क्या हैं
कैसे ढलते हैं सरेशाम
शाम के साये
मह्ब्ब्त की तपिश मे जलना
और जलते रहना
इश्क - ऑ जुनूं की बातें
ऐ काश कि हम भी सोचें
दो चार घडी
गमे दुनिया से कभी
राहत जो मिले
फुरसत जो मिले
______________________
1 शान्ति २ गाल ३ जादूभरी ४ मदिरा पिलाने का पात्र ५ नाच ६ निर्धनता ७ रौशनी ८ बहुमूल्य कपडों का नाम 9 दुःख भरा युग १० शंन ११ शान्ति
Thursday 8 May 2008
एक लम्हा
सिर्फ़ एक लम्हा
वक्त की इकाई
इकाई का भी कोई हिस्सा
सिर्फ़ एक लम्हा
अजनबी निगाहें
निगाहों का हादसा
धड़कते जिस्म , जलते होंठ
नीम उरीयाँ १ जिस्म का उभरा हुआ हिस्सा
बेताब सदा २ ______ मैंने सोचा
बेताब सदा को
अल्फाज़ ३ का पैराहन ४ दूँ
वक्त की इकाई
इकाई का कोई भी हिस्सा____कैद कर लूँ
जंजीर पहना दूँ मगर
वक्त के तकाजों ने
ये हकीर ५ लम्हा भी छीन लिया हमसे
सिर्फ़ एक लम्हा
१ अर्धनग्न २ आवाज़ ३ शब्दों का ४ लिबास ५ तुछ
वक्त की इकाई
इकाई का भी कोई हिस्सा
सिर्फ़ एक लम्हा
अजनबी निगाहें
निगाहों का हादसा
धड़कते जिस्म , जलते होंठ
नीम उरीयाँ १ जिस्म का उभरा हुआ हिस्सा
बेताब सदा २ ______ मैंने सोचा
बेताब सदा को
अल्फाज़ ३ का पैराहन ४ दूँ
वक्त की इकाई
इकाई का कोई भी हिस्सा____कैद कर लूँ
जंजीर पहना दूँ मगर
वक्त के तकाजों ने
ये हकीर ५ लम्हा भी छीन लिया हमसे
सिर्फ़ एक लम्हा
१ अर्धनग्न २ आवाज़ ३ शब्दों का ४ लिबास ५ तुछ
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